Archive in : 2020

अगस्त क्रांति : जिसने हिला दी अंग्रेजी हुकूमत की जड़े

अगस्त क्रांति : जिसने हिला दी अंग्रेजी हुकूमत की जड़े

अगस्त क्रांति के दौरान जो महत्वपूर्ण युवा नेता उभरकर सामने आए उनमें जय प्रकाश नारायण, मीनू मसानी, अच्युत पटवर्धन तथा अरुणा आ…
दाढ़ी पर चर्चा : चार इंच से लंबी दाढ़ी नहीं रख सकता कोई

दाढ़ी पर चर्चा : चार इंच से लंबी दाढ़ी नहीं रख सकता कोई

महान सिकंदर दाढ़ी का विरोधी रहा है उसने अपनी सेनाओं को दाढ़ी रखने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था उसका कथन था कि सैनिकों की दाढ़…
विचार - विमर्श : समस्याओं की बेड़ियों में जकड़ी भारत की प्रगति

विचार - विमर्श : समस्याओं की बेड़ियों में जकड़ी भारत की प्रगति

विश्व का कोई भी देश या समाज अपने आप में न तो पूर्णत: समृद्ध है और न ही सुव्यवस्थित। हर एक देश की चाहे वह छोटा हो या फिर बड़ा…
 आत्मकथा : जनसंचार की राह से : डॉ. रामजीलाल जांगिड़

आत्मकथा : जनसंचार की राह से : डॉ. रामजीलाल जांगिड़

पुराने कागज देख रहा था। एक रजिस्टर में अधूरी सूची मिल गई। मैंने 1955 में अपने गृह नगर से हाई स्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की थी…
संस्मरण : भारत को 21वीं सदी में ले जाने वाले राजीव गाँधी

संस्मरण : भारत को 21वीं सदी में ले जाने वाले राजीव गाँधी

राजीव गाँधी के नेतृत्व की चर्चा हम सब समय समय पर करते रहे है। उन्होने किस प्रकार पंजाब मे शांति के लिए पहल की, मिज़ोरम समझौत…
कोरोना व पढ़ाई : कोरोना काल में नन्हे-मुन्ने बच्चों की पढ़ाई

कोरोना व पढ़ाई : कोरोना काल में नन्हे-मुन्ने बच्चों की पढ़ाई

मार्च 2020 के अंतिम सप्ताह से लॉक डाउन क्या शुरू हुआ बच्चों की पढ़ाई ही रुक गई ना स्कूल जाना ना स्कूल जाने की तैयारी करना और…
विचार-विमर्श : क्या सिर्फ वाह-वाह करेंगे देशवासी?

विचार-विमर्श : क्या सिर्फ वाह-वाह करेंगे देशवासी?

है दराबाद गैंग रेप के चारों आरोपियों को पुलिस ने “एनकाउंटर” में मार गिराया। पुलिस का दावा है कि वह आरोपियों को घटनास्थल पर क…
विकास गाथा : भारतीय उद्योग जगत के पितामह “जमशेदजी टाटा”

विकास गाथा : भारतीय उद्योग जगत के पितामह “जमशेदजी टाटा”

आ ज जब उद्योग-धंधों के विकास के साथ भारत विश्व की आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है तब हम उस भविष्य दृष्टा को नहीं भूल …
संस्मरण : भारतीय संस्कृति के प्रतीक संत रविदास

संस्मरण : भारतीय संस्कृति के प्रतीक संत रविदास

सं त रविदास निगुर्ण भक्ति धारा, के प्रभुभक्त, साथक, सामाजिक एकता, मानववादी तथा सर्व-धर्म समभाव के तपरवी महापुरुष थे। वे मध्य…
विचार - विमर्श : महात्मा गाँधी की दृष्टि में सभ्यता की अवधारणा

विचार - विमर्श : महात्मा गाँधी की दृष्टि में सभ्यता की अवधारणा

स भ्यता एक व्यापक अवधारणा है जिसका आधार “सभ्य” है। सभ्य का अर्थ सभा का, सभा से, संबंध, सभा के योग्य, शिष्ट, संस्कृत, नम्र,…
संस्मरण : भारतीयता के प्रतीक “शास्त्रीजी”

संस्मरण : भारतीयता के प्रतीक “शास्त्रीजी”

ला ल बहादुर शास्त्री ने पंडित जवाहरलाल नेहरु की मृत्यु के बाद जून 1964 प्रधानमंत्री का पद संभाला। 10 जनवरी 1966 की रात को ता…
मीडिया मंथन : गाँधीवादी मूल्यों और संचार शैली की मीडिया के लिए प्रासंगिकता

मीडिया मंथन : गाँधीवादी मूल्यों और संचार शैली की मीडिया के लिए प्रासंगिकता

म हात्मा गाँधी का बहुआयामी व्यक्तित्व था। वे दार्शनिक-संत, एक गहरे धार्मिक व्यक्ति, अशांति में दुनिया को शांति के दूत, एक …