सत्ता के गलियारों से : उत्तर प्रदेश वाह-वाह और आह-आह के बीच सहमा सच

त्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार अपने पूरे कार्यकाल की आधी दूरी पार कर चुकी है। दो साल पूरे होने पर चुनावों के चलते प्रदेश सरकार अपनी उपलब्धियों के बारे में बहुत कुछ नहीं कह पाई थी, सो उसकी ढाई साल पूरे होने पर उसकी कसर पूरी की जा रही है। मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ पार्टी भारतीय जनता पार्टी इन ढाई वर्षों को अभूतपूर्व उपलब्धियों भरा बताने और साबित करने में जुटे हैं। दूसरी ओर, विपक्ष इस अवधि को असफलता और नकारात्मक का चरम छूने वाला दौर साबित करने वाले तथ्यों के साथ हमलावर हो रहा है। अलबत्ता, सच इन दोनों अतियों के बीच सहमा खड़ा है और हर कोई उसकी अनदेखी करना चाहता है।

बीती 19 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संवाददाता सम्मेलन करके बताया कि ढाई साल का उनका कार्यकाल प्रदेश में सुशासन, सुरक्षा और विकास को रफ्तार देने वाला होने के साथ ही जनता के विश्वास का प्रतीक रहा है। उल्लेखनीय है कि सरकारी प्रचारतंत्र एवं और संचार माध्यमों ने इस अवधि में मुख्यमंत्री को लगातार विकास योजनाओं को मूर्त रूप देने वाले तथा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने वाले अत्यंत परिश्रमी व ईमानदार कार्यशैली वाले व्यक्ति के रूप में पेश किया है। प्रचारों और सभी संवादों में प्रदेश में हो रहे सभी कार्यों का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिया जाता रहा है, लेकिन इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके साथ उनके दोनों उपमुख्यमंत्री और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी मौजूद थे और उन्होंने उपलब्धियों को सामूहिक बताते हुए अपने पूरी सरकार और प्रशासनिक मशीनरी की प्रशंसा की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इन गुजरे सालों में प्रदेश के बारे में लोगों का नजरिया बदला है और कामकाज की बदौलत उनकी सरकार ने जनता का विश्वास हासिल किया है। योगी ने कहा कि हमने प्रदेश को ढाई वर्ष में पहचान के संकट से उबारा है।

किसानों और गरीबों के लिए किए कामों को गिनाते हुए मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के ढाई सालों को विकास एवं सुशासन के 30 माह बताया। उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं में वृद्धि, नए मेडिकल कालेजों व एम्स की स्थापना, शिक्षा में सुधार के प्रयासों आदि का उल्लेख करते हुए दावा किया कि प्रदेश में अपराधों में कमी आई है। अपराधों पर लगाम लगाए जाने की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी बेहतर कानून व्यवस्था के चलते गुजरे ढाई सालों में दुर्दांत अपराधी राज्य से बाहर चले गए हैं। उन्होंने अलग-अलग अपराध वर्गों में कमी के आंकड़े भी गिनाए।

जनहित की योजनाओं को धरातल पर लाने का उल्लेख करते हुए ढाई वर्ष में ग्रामीण क्षेत्र में दो करोड़ 61 लाख शौचालय बनाने, शहरी क्षेत्र में दस लाख से अधिक शौचालय बनाने, कन्या सुमंगला योजना शुरू किए जाने, पेंशन धारकों की संख्या बढ़ने, समाज के वंचित समुदायों के विकास के लिए नई योजनाएं लागू करने तक सब कुछ गिनवाया।

प्रदेश भर में सड़कों का जाल बनने, शहरों को हवाई मार्ग से जोड़े जाने, उनमें मेट्रो और रैपिड रेल यातायात का नियोजन किए जाने के अलावा योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि प्रदेश में आए निवेश से 20 लाख नौजवानों को रोजगार के रास्ते खुले है। एमएसएमई से स्वाबलंबन बढ़ा है। हमने पूरे देश मे सबसे ज्यादा निर्यात किया है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अब उत्तर प्रदेश देश में सभी राज्यों से आगे चल रहा है।

दूसरी ओर विपक्ष ने मुख्यमंत्री के दावों को सिरे से नकारते हुए कई क्षेत्रों में सरकार की गंभीर असफलताओं का उल्लेख किया। बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रदेश सरकार के पिछले ढाई साल के कामकाज पर टिप्पणी करते हुए इसे निराशाजनक व विफल बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का ढाई साल का कार्यकाल जनहित, जनकल्याण व प्रदेश का पिछड़ापन दूर करने के लिए विकास के अधिकतर मामलों में निराशाजनक रहा है। खासकर, अपराध नियंत्रण व कानून-व्यवस्था के मामलों में तो यह सरकार बुरी तरह से विफल साबित हुई है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार अपनी कमियों पर पर्दा डालते रहने के बजाय उन्हें दूर करने पर ध्यान केन्द्रित करे तो यह प्रदेश व जनहित में ज्यादा बेहतर होगा।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार के काम पर तंज कसते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार तो ढाई वर्ष में ढाई कोस भी नहीं चल सकी है। योगी सरकार की कार्यशैली और सरकार के रिपोर्ट कार्ड पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अपने झूठों का जश्न मना रही है जबकि प्रदेश में हत्याएं और बेटियों के साथ अपराध बढ़े हैं।

मीडिया पर भी उन्होंने निशाना साधा और कहा कि जब प्रदेश सरकार ने यहां के माहौल को अराजकता, लूट खसोट और असुरक्षा 'युक्त' बनाया है तो, मीडिया में  इसे 'मुक्त' लिखा जा रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि, “उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। 100 नंबर को बिल्कुल खत्म कर दिया है। सरकार को सबसे ज्यादा नोटिस ह्यूमन राइट कमीशन से मिले हैं। कहीं भी कोई पीट-पीटकर मार डाला जाता है। रामपुर में शासन-प्रशासन राजनीतिक प्रतिशोध ही नहीं, राजनीतिक उत्पीड़न में लिप्त है। यूपी में इतनी हत्याएं कभी नहीं हुईं, जितनी अब हो रही हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के पास असली आंकड़े हैं, लेकिन सरकार उन्हें छिपा कर झूठे आंकड़ों से जश्न मना रही है।

कांग्रेस ने भी योगी सरकार के पिछले ढाई सालों को बढ़ती बेरोजगारी, अपराध, महिला हिंसा और पुलिसिया उत्पीड़न के लिए इतिहास में दर्ज होने लायक माना है। कांग्रेस का आरोप है कि इस दौरान किसान छला गया, युवा ठगा गया और महिलाओं की असुरक्षा बढ़ी, आम जनता पर टैक्स की मार पड़ी, व्यापारी लाचार हुआ, अपराधियों को सत्ता का संरक्षण मिला तो गरीबों-वंचितों का पुलिस उत्पीड़न बढ़ा। कांग्रेस ने राज्य में बेरोजगारी दूर करने के दावों को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि नौकरी के नाम पर आउटसोर्सिंग हो रही है जबकि देश और प्रदेश में बेरोजगारी की दर 45 साल में सबसे ज्यादा है।

कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता व पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रभारी अजय कुमार लल्लू ने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रदेश सरकार का वादा था कि उत्तर प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिया जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। पिछले 45 साल में इतने बड़े पैमाने पर बेरोजगारी दर कभी भी नहीं रही है। लोकसेवा आयोग से लेकर तमाम भर्ती परीक्षाओं का बुरा हाल है। पिछले ढाई साल में शायद कोई भर्ती रही हो जिसमें पेपर लीक नहीं हुआ हो, सिर्फ इतना ही नहीं रोजगार मांगने पर बेरोजगार नौजवानों पर लाठीचार्ज किया जाता है, जेल भेजा जाता है। फर्जी मुकदमे में फंसाया जाता है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार द्वारा युवा पीढ़ी को निकम्मा बताने के बयान पर भी रोष व्यक्त किया।

कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर योगी आदित्यनाथ सरकार को असफल घोषित करते हुए लल्लू ने कहा कि भाजपा का बीता आधा कार्यकाल ध्वस्त कानून-व्यवस्था और पुलिसिया उत्पीड़न का कार्यकाल रहा है। प्रदेश में लगातार अपराध बढ़ रहे हैं। सरेआम बलात्कारियों के संरक्षण में पूरा शासन-प्रशासन लगा हुआ है। कुलदीप सिंह सेंगर से चिन्मयानन्द तक के मामले में प्रदेश की जनता ने इसका खेल देखा है। यही इस सरकार का असली चरित्र है। इसी क्रम में उन्होने कहा कि भाजपा का यह कार्यकाल सहारनपुर से लेकर बलिया तक दलित उत्पीड़न के लिए और सोनभद्र से हरदोई तक बढ़ते सामंती दम्भ के लिए भी जाना जाएगा। उन्होने पूछा कि यह भाजपा का कैसा रामराज्य है जिसमें दलितों, पिछड़ों और मुसलमानों पर दमनकारी पुलिसिया उत्पीड़न हो रहा है।

इन्वेस्टर समिट की सफलता के दावों को हवा में उड़ाते हुए कांग्रेस नेता ने पूछा कि सरकार बताए कि इतना समय बीत जाने के बावजूद आज तक निवेशकों ने प्रदेश कहां एक भी पैसे का निवेश किया है। उन्होंने बालू खनन और भूमाफियों को मिल रहे संरक्षण का भी उल्लेख किया।

इन ढाई वर्षों में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में बढ़ोतरी का उल्लेख करते हुए लल्लू ने कहा कि उन्नाव से शाहजहांपुर तक भाजपा नेताओं की करतूतें सामने आ रही है। विश्वविद्यालय तक में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। सड़कों पर और मीडिया में चीख-चीखकर बेटियां अपना दर्द बयां कर रही हैं लेकिन पूरी निर्लज्जता के साथ भाजपा बलात्कारियों को संरक्षण दे रही हैं। कांग्रेस नेता ने बीते ढाई सालों को जंगलराज और युवाओं और महिलाओं के साथ धोखेबाजी का कार्यकाल भी करार दिया।

विपक्ष के इन दावों को काफी हद तक सच के करीब माना जा सकता है, लेकिन सरकार की सफलता के आंकड़े भी सिरे से झूठे नहीं हैं। यह जरूर है कि प्रचार में भरोसा रखने के इस दौर में सरकार और भाजपा मिल कर अपनी उपलब्धियों को वास्तविकता से कई गुना बड़ा दिखाने के आदी हैं। कम से कम सरकारी विज्ञापनों के बूते राजस्व जुटाने वाला मीडिया को इन दावों के जमीनी सच की पड़ताल करने नहीं जा रहा है। हां, जनता जरूर अपने इर्द-गिर्द का सच जानती है, लेकिन उसे भी अनुमान लगाने का शौक है जो अक्सर कल्पना मात्र होते हैं। #

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