विचार-विमर्श : क्या सिर्फ वाह-वाह करेंगे देशवासी?


हैदराबाद गैंग रेप के चारों आरोपियों को पुलिस ने “एनकाउंटर” में मार गिराया। पुलिस का दावा है कि वह आरोपियों को घटनास्थल पर क्राइम सीन को रिक्रिएट करने ले गयी। जहां से आरोपी भागने लगे। जो कि कुछ हज़म नहीं हुआ? निहत्थे आरोपी भारी भरकम पुलिस के कब्जे से भागने लगे! ये कोई बॉलीवुड की फ़िल्म है क्या? जांच होगी तो पता चलेगा कि पुलिस ने इन आरोपियों का कोल्ड ब्लडेड मर्डर किया है या फिर कुछ और। खैर, जो भी हुआ गलत हुआ। 

फिर तो देश भर की पुलिस कल किसी अन्य मामले में भी आरोपी की ऐसे ही फर्जी एनकाउंटर में हत्या कर देगी और देशवासी वाह-वाह करेंगे? इससे पुलिस के हौसले बढ़ेंगे और वह बेकसूर नागरिकों को भी मारेगी। ऐसे ही एनकाउंटर के नाम पर।हालांकि पुलिस का काम सज़ा देना नहीं, जांच कर सबूत इकट्ठे करना होता है। सज़ा देने का अधिकार सिर्फ कोर्ट को है। ये एक डिसिप्लिन है, एक व्यवस्था है जिसका देश में हर हाल में पालन होना चाहिए। 

वैसे तो होना यह चाहिए था कि हैदराबाद गैंग रेप मामले में समय सीमा तय कर आरोपियों को सज़ा सुनाई जाती और उन्हें फांसी दी जाती। लेकिन यह हैरानी की बात है कि निर्भया की मां भी पुलिस के इस फेक एनकाउंटर का समर्थन कर पुलिस को धन्यवाद दे रही हैं। शायद उनकी समझ उन्हें यही कहने के लिए कहती हो। लेकिन इसका एक और भी पहलू है। निर्भया कांड के दोषी अभी तक जिंदा क्यों हैं? निर्भया की मां पिछले सात सालों से उनकी फांसी के लिए क्यों भागदौड़ कर रही हैं? हमारा ये पूरा सिस्टम फैल क्यों है? 

इसका जवाब संसद से मांगिए और हिन्दू-मुसलमान करना ज़रा कम कीजिए। नागरिक बनिए, गुलाम नहीं। एक और बात। कल उन्नाव में फिर एक रेप पीड़िता को जलाकर मार दिया गया। दिल्ली में एक नर्स को बलात्कार से बचने के लिए ऑटो रिक्शा से कूदना पड़ा। ऐसे में देश भर में सरकार के खिलाफ गुस्सा है। 

इस मामले की न्यायिक जांच हो और जांच रिपोर्ट एक महीने के अंदर सौंपकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो ताकि पुलिस फर्जी एनकाउंटर से पहले (अगर हुआ है तो) सौ बार सोचे। वह किसी राजनीतिक दबाव में ना आए। #

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