अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य : भारत - इजराइल: जल संरक्षण की दिशा में एक संयुक्त पहल

 


पानी आपूर्ति की समस्या जो कि आज एक गंभीर समस्या के तौर उभर रही है। केरल जैसे राज्य जहां पानी हर वक्त तथा ओर दिखाई देता था, लेकिन आज वहां के लोग जल की भारी कमी की समस्या से जूझ रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश का भी है जहाँ पर कभी पर्याप्त मात्रा में बारिश हुआ करती थी और जल अथाह मात्रा में मौजूद रहता था वहां पर आज लोग पीने के पानी के लिए भी तरश रहे हैं।  ऐसे में तो दिल्ली और महाराष्ट्र के बारे में क्या कहना।

जल आपूर्ति की समस्या पर विचार करने के लिए भारत इजराइल मैत्री फोरम (Indo Israel Friendship Forum) ने दिल्ली के तीन मूर्ति भवन स्थित नेहरु मेमोरियल म्यूजियम में एक सेमिनार का आयोजन हाइफा दिवस के अवसर पर किया। दुसरे दिन सितम्बर 23 को तीनमूर्ति हाइफा चौक पर 900 भारतीय सैनिको को श्रृद्धांजलि दी।  जोधपुर, मैसूर और हैदराबाद के घुड़सवार सैनिकों ने सिर्फ भाला और तलवार के दम पर वर्ष 1918 में हाइफा बंदरगाह को ओटोमन तुर्क से मुक्त कराया। इन सैनिकों के बलिदान ने ही इजराइल की बुनियादी नींव रखी थी।

श्रृद्धांजलि सभा में इजराइल के राजदूत रोंन मलकान, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इन्द्रेश कुमार, फोरम फॉर नेशनल सिक्यूरिटी के अध्यक्ष जनरल आर एन सिंह, एयर मार्शल आर सी वाजपेयी, विश्व विभाग के प्रमुख रवि कुमार, जनरल सेक्रेटरी जसबीर सिंह और एनडीएमसी की सचिव रश्मि सिंह व अन्य प्रमुख उपस्थित थे। रश्मि सिंह ने कहा कि नए नामकरण के अनुसार हाइफा चौक के नए रोड साइन लगाये गए है और चौक का सौन्दर्यीकरण किया गया है।   

इसी दिन प्लास्टिक के वर्जन के लिए भी प्रतिज्ञा की गयी। इस अवसर पर पानी के संरक्षण के लिए काम करने के लिए विशिष्ट लोगों को सम्मानित किया गया। वे है रूप चौधरी, उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक; डॉ अमरिंदर कौर, भारतीय वनिकी सेवा; लुधियाना के एको सिख; जलाधिकार फाउंडेशन के अनुराग शर्मा, राजीव सक्सेना, दिनकर त्रिपाठी; राजस्थान चामुंडा सेना – विक्रम सिंह; श्रीमती अमीना शेरवानी; और श्रीमती मनीषा जे वि।

पानी की दुनिया विचित्र है, ज्यादा हो तो समस्या, कम हो तो समस्या और न हो तो खाना ही क्या। बारिश हो तो मुश्किल न हो तो मुश्किल। बाँध बनाकर पानी रोकने से बरसात में ज्यादा पानी छोड़ना मुशकील पैदा करता है। रिसायकल करना और बर्बाद करना भी समस्या है। इजराइल ने इस समस्या से जूझने के नए उपाए किये है। इजराइल भारत को चेन्नई में समुद्र के जल को साफ कर पीने के लिए इस्तेमाल करने में मदद कर रहा है। भारत ने इजराइल के साथ 28 जल केन्द्रों की स्थापना की है।

पानी का अतिदोहन और शहरी कारन, पालम से 60 कम दूर एअरपोर्ट का निर्माण दिल्ली के आस पास रेगिस्तान बना रहा है। एक हजार से ज्यादा पोखर, तालाब और झाल को मिटाने से गंभीर समस्या पैदा हो रही है। जेवर का मुन्सिपलिल्टी भी एक विशाल तालाब पर कब्ज़ा कर बनाया गया।

माना जाता है की पानी घरो में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। वस्तुतः घरो में केवल 8 प्रतिशत पानी की जरूरत होती है। परिवहन में 13 प्रतिशत, खेती में 14 प्रतिशत, वन निर्माण में 17 प्रतिशत और उद्योग में 19 प्रतिशत जल का उपयोग होता है। कार बनाने में, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के मान्यता के विपरीत, अधिक पानी का इस्तमाल होता है अगर एनजीटी कि बात मानकर नयी चलती हुई दस साल पुरानी गाडियों को कूड़े में डाला जाता है तो जल प्रदूषण बढ़ता है। सबसे अधिक 26 प्रतिशत बिजली उत्पादन में इसका उपयोग होता है। और कुछ भी करे तीन प्रतिशत जल तो बर्बाद होता है।

प्रमूख वक्ता व कीनोट स्पीकर, ब्रह्मा चेलानी, जो विशिष्ट रणनीतिज्ञ है और सेंटर फॉर पालिसी रिसर्च के प्राध्यापक है, ने कहा जल आगामी युद्ध के कारण होंगे। पानी की सबसे बड़ी समस्या है आप इसे आयात नहीं कर सकते हैं। जल पेट्रोल से 20 प्रतिशत भारी होता है और इसका ढोना मुश्किल होता है। और यदि आप करे तो भी बहुत महंगा पड़ता है।

पेट्रोल का तो विकल्प है पर पानी का नहीं है। थोड़ी सी भी पर्यावरण से छेड़छाड़ किया जाये तो पानी का रुख बदल जाता है। 1967 के छह दिन के युद्ध में इजराइल ने उस क्षेत्र का जल मानचित्र ही बदल दिया।

चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर एशिया का जल और ग्लेशियर पर कब्ज़ा कर जल को रण के लिए इस्तेमाल कर रहा है। एशिया में विशेषकर भारत में जल संकट पैदा कर रहा है। चीन भारत पर पानी को रोककर और बारिश के समय छोड़ कर पूर्वोत्तर में भीषण स्थिति पैदा कर रहा है। चीन भारत को हाइड्रोलिक डाटा नहीं दे रहा है। इससे असम और प्रुवोत्तर में समस्या से जूझना पड़ रहा है, चेलानी ने कहा।

भारत ने 1960 में सिन्धु जल संधि पाकिस्तान के साथ की। चेलानी ने कहा कि यह विश्व का सबसे उदार जलसन्धि है। इसके तहत सिन्धु नदी क्षेत्र के चेनाब, झेलम और सिन्धु के 80 प्रतिशत पानी पाकिस्तान को दिया गया। केवल रावी और सतलज का 19.48 प्रतिशत जल ही भारत को मिलता है। पाकिस्तान ने इसे अपनी आधी जीत माना।

फोरम फॉर नेशनल अवेयरनेस के मार्गदर्शक इन्द्रेश कुमार ने कहा की पानी विश्व के लिए संकट है। इसे सर्वत्र दोस्त बनाकर हि समाप्त क्या जा सकता, जीवनदायिन शक्ति का रणनीतिक उपयोग नहीं होना चाहिए। विश्वमैत्री से यह संभव हो सकता है। उन्होंने कहा प्रकृति से प्यार करना चाहिए। पनी से प्यार होगा तो खुशहाली होगी बैर होगा तो परेशानी होगी। भारत विश्वगुरु पर्यावरण के साथ मतित्री से ही बना था। उसी से यह देश सोने की चिड़िया कहलाती थी। सोच में प्रदुषण से ही विश्व में परेशानी है। विश्व के जो अपने को थानेदार समझते है, शोषण और बर्बादी कर रहे है। जिसके हाथ लाठी उसके भैस होती जा रही है। बुद्धिजीविओं को विश्वमानस परिवर्तन करना चाहिए। भारत बदल रहा है। ज्ञान और परिस्थितिया भारत को अग्रिम नेतृत्व में पहुंचा रही है। भारत ही विश्व समस्या का समाधान कर सकता है।

पानी के इस समस्या से निबटना आसान नहीं है। नदी और भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन हो रहा है। इससे सूखे की भयंकर स्थिति पैदा हो रही है। चेलानी ने कहा जल के व्यवहार को सम्यक बनाने की जरुरत है। साथ ही स्वच्छ जल तकनीक को अपनाने की जरुरत है। पानी को रिसायकल करना भी जरूरी है। सिंगापुर अपने जल संसाधनों का 60 प्रतिशत गन्दा पानी रिसायकल करता है। अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में भीषण संकट है, वहां पर केवल 5 प्रतिशत पानी को पुनर्शोधन किया जाता है। लेकिन इजराइल 85 प्रतिशत जल का शोधन कर पुनः प्रयोग करता है।

झारखण्ड में भुन्ग्रू के प्रणेता राजा बागची ने उनके अनूठा कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया। भुन्ग्रू एक प्रकार का सरकंडा होता है। इसे जमीन में गाड़कर बरसाती पानी का ऐसे क्षेत्र में सरंक्षण किया जाता है जहां पथरीली जमीन में पानी रूकता नहीं है। गावों में यह प्रयोग कर बारिश के पानी को जमीन के नीचे रोका जाता है और सूखे के समय निकाला जाता है। इस तकनीक में सैटेलाइट और भौगोलिक अध्ययन किया जाता है। इससे हिमाचल, और झारखण्ड में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका सबसे पहले प्रयोग गुजरात में भूकंप के बाद वहां की जमीनी संरचना में परिवर्तन के बाद किया गया। 

नई दिल्ली नगर पालिका (एनडीएमसी) के बागवानी के निदेशक एस चेल्लिया ने कहा की इजराइल और भारत खेती और पानी पर संयुक्त कार्यक्रम कर रहा है। दिल्ली में भी जलशक्ति आन्दोलन किया जा रहा है। एनडीएमसी पानी का पुनरुपयोग कर कार्बन रैंक ऊँचा कर दिया है। अब बागवानी के लिए बोरवेल का उपयोग न कर 100 पुनर्शोधन प्लांटों से आये जल का उपयोग कर रहा है।

उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले जिलाधीश हीरा लाल ने कहा की उन्होंने अपने जिले में तालाबों का संस्कार, संरक्षण और खुदाई करा कर सूखे क्षेत्र के समस्या का समाधान का प्रयास किया है। उन्होंने नारा दिया नल से तालाब की ओर। नल से जल पहुँचाने का काम व्यय साध्य है, इसमें जल का अपचय होता है और देश के धन का नाश होता है। उन्होंने बताया की उनके आन्दोलन ने पुरे प्रदेश में एक नए उर्जा का संचार किया है। जिले में तालाब बनने से जलस्तर में सुधर हुआ है और प्रदेश सरकार पुरे प्रदेश में तालाबों को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। 

विशिष्ट अतिथि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति शम्भुनाथ श्रीवास्तव, जो बाद में छत्तीसगढ़ के लोकपाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कानून के प्रावधानों का प्रयोग कर उत्तर प्रदेश के अलीगढ में कब्जा हटवा कर 560 तालाबों का खुदाई और संरक्षण करवाया। कई जल क्षेत्र और बड़े तालाबों के सुख जाने से अलीगढ जिले में भारी संख्या में पक्षी मर गए। इसका संज्ञान लेते हुए उन्होंने यह कानूनी जंग छेड़ा। 90 दिनों में कब्ज़ा हटवा कर उन जल क्षेत्रों को मुक्त कराया गया।

उन्होंने आगे यह भी कहा कि आज गंगा की समस्या बांधों का निर्माण है। भागीरथी पर तेहरी से लेकर अलकनंदा, हरिद्वार, बिजनोर, कानपूर तक बने बांधो ने गंगा को समाप्त कर दिया है। गंगा की सफाई तब तक सफल नहीं हो सकती है जब तक जल प्रवाह निरंतर न हो। तेहरी जैसे बांध पर्यावरण को क्षति पहुंचाते है और पर्वतीय क्षेत्र में जल की गुणवत्ता कम करते है। गंगा तथा यमुना का पानी रोककर और बारिश के समय पानी छोड़कर तबाही मचाया जाता है।

हरियाणा के पूर्व विधायक रामजी जैमल ने कहा कि उन्होंने पेड़ लगाने का व्यापक कार्यक्रम किया। 12 करोड पौधे उन्होंने बांटे और लगवाये। इससे गंदगी हटती है और भूमि में जल का संचार होता है। उन्होंने शमशान को वहां खाली पड़े जगहों पर पेड़ लगाकर पार्क में बदल दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कुल 38000 रुपए में चुनाव लड़ें। चुनाव में खर्च गलत कारणों से होता है और उससे भी प्रदूषण बढ़ता है। #

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