आर्थिक जगत : आखिर क्यों खुदरा व्यापारियों व सीमांत किसानों को कोई राहत नहीं मिली

पिछले कुछ समय से हमारी भारतीय अर्थव्यवस्था एक कठिन दौर से गुजर रही है। वर्ष 2016 में हुई नोटबंदी तथा अगले वर्ष लागू हुई जीएसटी के बाद अर्थव्यवस्था का तेजी से उपर चढ़ता ग्राफ कुछ पल के लिए तो रुका अवश्य था लेकिन उस समय आर्थिक संकट जैसी स्थित का कोई संकेत मौजूद नहीं था। समय के साथ-साथ आर्थिक विकास के क्षेत्र में कुछ अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय कारणों से आए गतिरोध तथा मांग और उत्पादन में कमी के कारण वर्ष 2018 में आर्थिक संकट के संकेत स्पष्ट दिखने लगे। आज इन संकेतों ने संकट का व्यापक रुप धारण कर लिया है।

देश में आर्थिक मंदी, पिछले पांच तिमाहियों से जीडीपी विकास दर में गिरावट, बाजार में गिरावट, घरेलू के साथ-साथ विदेशी निवेश औद्योगिक उत्पादन की कमी, कमजोर दर, बढ़ती बेरोजगारी और घटती मांग को देखते हुए अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार के द्वारा किए गए मौजूदा उपाय से बड़े व्यवसाय को अधिक फायदा तो अवश्य होगा लेकिन छोटे और मध्यम व्यवसाय-व्यापार को बहुत मामूली सा लाभ मिलेगा।

इन मौजूदा घोषित किए गए उपायों से राजकोषीय और बजटीय घाटे पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, लेकिन अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने, घरेलू और विदेशी निवेश बढ़ाने, खपत, मांग और विनिर्माण के सुधार में सहायता मिलेगी। हालांकि, लाखों सीमांत किसानों, छोटे खुदरा विक्रेताओं, पारंपरिक उद्योगों जैसे-कपड़ा, हथकरघा, जवाहरात और संगठित क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए किसी भी राहत की घोषणा नहीं की गई।

घरेलू विनिर्माण कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स की दरों को 30 प्रतिशत से 22 प्रतिशत (400 करोड़ रुपये तक के राजस्व के साथ) और नई निर्माण कंपनियों के लिए 25 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक घटा दिया गया है। कर कटौती 1 अप्रैल, 2019 से पूर्वव्यापी रूप से प्रभावी होगी। सरचार्ज हमेशा की तरह नई दरों पर देय होगा। जिन कंपनियों ने सरकार से कोई लाभ नहीं लिया है, उन्हें 25 प्रतिशत के बजाय 22 प्रतिशत कर का भुगतान करने की सुविधा दी गई है।

कॉर्पोरेट कर को कम करने से सरकार को कुल राजस्व हानि 145,000 करोड़ रुपए की होगी। यह वास्तव में एक बहुत साहसिक कदम है, और तेजी से विकसित होती अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के अनुरूप बढ़ता भारत का यह कदम है। उद्योग द्वारा इसका व्यापक रूप से स्वागत किया गया है क्योंकि यह उनके लाभ में वृद्धि करेगा तथा उन्हें विदेशी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने और घरेलू निवेश को बढ़ावा देने में सक्षम करेगा। जब कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती की घोषणा हुई तो सेंसेक्स 5.3 प्रतिशत बढ़ा। स्टॉक मार्केट के लिए यह मई 2009 के बाद से सबसे अच्छा दिन था। ऑटो इंडस्ट्री की मांग में गिरावट के साथ लगे सबसे बड़े झटके से उद्योग जगत ने राहत की सांस ली। त्यौहार के सीज़न जैसे नवरात्रि और दिवाली के समय मांग में वृद्धि और लागत में कमी होने की संभावना दिखाई दी।

जीएसटी काउंसिल ने उत्पादों और सेवाओं के तमाम क्षेत्रों पर कर कटौती की घोषणा की है। जिसमें होटल में रहना और आउटडोर खानपान, हीरे की कटौती और पॉलिश किए गए अर्द्ध कीमती पत्थरों से संबंधित काम शामिल हैं। 1000 रुपये के टैरिफ तक के होटल के कमरे पर किसी भी जीएसटी का भुगतान नही करना होगा। 1000-7500 रुपए के कमरों पर कर की दर 12 प्रतिशत होगी और 7500 से अधिक दर के कमरों पर यह दर 18 प्रतिशत की होगी। होटल के सभी श्रेणी के कमरों के किराए में कर की दर कम होने से तथा बाहरी खानपान पर टैक्स कम होने से पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

हीरे से संबंधित काम पर बचत दर 5 प्रतिशत से घटाकर 1.5 प्रतिशत और इंजीनियरिंग सेवाओं को 18 प्रतिशत से घटाकर कर की दर 12 प्रतिशत कर दिया गया है। काउंसिल ने आईटी सेक्टरों तथा विदेशी कंपनियों के लिए भारतीय फार्मा कंपनियों द्वारा आउटसोर्सिंग और विशिष्ट अनुसंधान और विकास पर छूट देकर बड़ी राहत दी है।

हालांकि, जीएसटी काउंसिल ने वर्तमान में कैफीनयुक्त पेय पदार्थों पर कर की दर 12 प्रतिशत से 28 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। साथ ही उसने ऑटोमोबाइल और बिस्कुट पर कर कटौती के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। पर 400 करोड़ रुपये तक की कंपनियों पर कर कटौती से ऑटोमोबाइल उद्योग को लाभ होगा।  भारत में निर्माण के अवसरों की खोज करने वाली आगे की ऑटो कंपनियों को 15 प्रतिशत की कम दर पर आयकर का भुगतान करना होगा बशर्ते वे मार्च 2023 तक उत्पादन शुरू कर दें। इस कदम का उद्देश्य भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास और निर्माण को बढ़ावा देना है।

लघु और मध्यम उद्यमों के लिए भी राहत की घोषणा की गई है। कंपोजिशन स्कीम के तहत 2 करोड़, टाइम सेटलमेंट पॉलिसी पारदर्शी और समयबद्ध है। जीएसटी अथॉरिटी ने 15 दिनों के भीतर लोन डॉक्यूमेंट्स के साथ-साथ 30 दिनों के भीतर सभी रिफंड क्लियर करने और एसएमई की लिक्विडिटी प्रॉब्लम्स को हल करने का भी निर्देश दिया गया है।

खपत को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने राज्य के बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (एनबीएफसी) को इस त्यौहार के  सीजन के दौरान 400 जिलों में लोन मेले आयोजित करने का निर्देश दिया है। इसका लाभ खासतौर से नए ग्राहकों, किसानों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों और खुदरा उपभोक्ताओं के लिए है।

सरकार को पूरी आशा है कि इन नीतिगत उपायों द्वारा देश का आर्थिक संकट दूर हो सकेगा। सुधार के इन प्रयासों का अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य पर होने वाले असर का परिणाम आगामी मार्ट कर समझ में आयेगा। #

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