दाढ़ी पर चर्चा : चार इंच से लंबी दाढ़ी नहीं रख सकता कोई


महान सिकंदर दाढ़ी का विरोधी रहा है उसने अपनी सेनाओं को दाढ़ी रखने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था उसका कथन था कि सैनिकों की दाढ़ीया उन शत्रुओ को उन पर आक्रमण करने का आसानी से अवसर प्रदान करती हैं। 

वास्तविकता जो भी हो विश्व में सेना व प्रजा व अन्य देशों पर दाढ़ी रखने पर आज भी प्रतिबंध है। ईरान के खुमैनी को छोड़कर इस समय विश्व का एक भी राज्य ऐसा नहीं है जिसमें दाढ़ी को पसंद किया जाता हो या उसकी छूट दी जाती हो। 

दाढ़ी के बारे में यह आम धारणा है की यह प्राचीन संस्कृति की घोतक है पर राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर किसी ने भी कभी कोई दाढ़ी नहीं राखी थी। वर्तमान में गाँधी ने कोई दाढ़ी नहीं रखी थी।  दाढ़ी के बारे में यह भी मान्यता है कि यह पौरुष व वीरत्व की प्रतीक है। पर यहां भी हमें मात खानी पड़ती है। 

सिकंदर से लेकर नेपोलियन, हिटलर, मुसोलिनी जैसे शक्ति पुत्रों ने दाढ़ी कभी नहीं रखी। कुछ वर्तमान में प्रकट दाढ़ी का संबंध क्रांति से जोड़ते हैं। इस संबंध में कार्ल मार्क्स, लेनिन, ट्रास्की, बल्गनी, क्रास्टो आदि के नाम लिए जाते हैं। 

पर इसके विपरीत स्टालिन, माओ और भारत के भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद आदि ने कभी दाढ़ी नहीं रखी। दाढ़ी का यदि किसी से अधिक संबंध रहा है तो धार्मिक नेताओं, गुरुओ व दार्शनिको से प्राचीन काल के ऋषि दाढ़ी रखते थे और वह भी लंबी। 

भारत ही नहीं अन्य देशो में भी पुराने संतो ने, दार्शनिकों ने दाढ़ी रखी थी। जैसे मूसा जस्टिनियन मेजरडाओगी। इसी परंपरा में अनेक लेखकों व विद्वान ने भी दाढ़ी रखी थी जैसे वाल्टर कैले, शेक्सपियर, बर्नार्ड शा, एचडब्ल्यू लोंगफेलो, वाल्ट व्हिटमैन टॉलस्टॉय, डिकन्स, रविंद्र नाथ टैगोर, रचनाकार लियोनार्डो द विंची, ऑगस्टस आदि। 

वॉल्टियर का तो यहां तक कथन था कि विचार दाढ़ी की तरह आते हैं और दाढ़ी ही सब कुछ होती तो एक बकरा भी शिक्षा दे सकता था। इसी तरह जब ब्रिटेन ने सफाचट दाढ़ी वाले राजदूत को रूस में भेजा तो पीटर महान जिस के दरबार में सभी दरबारी दाढ़ी वाले थे ने व्यंग किया था यह क्या तुम्हारे राजा ने मेरे पास एक बच्चे को भेजा है। ब्रिटिश राजदूत ने तब सफाचट ठुड्डी पर उंगलिया फेरते हुए कहा था मान्यवर अगर हमारे राजा को यह पता होता कि आपको दाढ़ी ही चाहिए तो वह एक बकरे को भेज देते। 

पर बाद में मीटर महान भी दाढ़ी का कट्टर विरोधी हो गया था। 1676 में वह रूस का जार बना था और उसके समय में रूस में दाढ़ी का इतना रिवाज बढ़ गया था कि दाढ़ी रखना अनिवार्य माना जाता था। 

पीटर महान के सभी दरबारी दाढ़ी रखते थे। पीटर ने एक बार सभी दाढ़ी वाले दरबारियों को एक विशाल भोज में निमंत्रित किया उन सबको खूब शराब पिलाई जब मैं नशे में धुत हो गए तो नाचने वालों में से कुछ लोग रेजर लेकर उन पर पिल पड़े और उनकी दाढ़ीया मुंड डाली। यह कल्पना ही की जा सकती है कि वे महान दरबारी अगली सुबह अपनी दाढ़ी साफ पाकर क्या महसूस करते होंगे। 

पीटर ने दाढ़ी को प्रतिबंधित तो नहीं किया पर उसे प्रतिबंधित करने के लिए दाढ़ी पर 100 रूबल का कर लगा दिया पर पादरियों व गुलामों को छूट थी कि हर बार शहर के दरवाजे में घुसने पर केवल 1 रूबल कर देकर वह दाढ़ी रख सकते थे। बाद में कैथराइन गद्दी पर बैठी तो उन्होंने यह कानून रद्द कर दिया। 

इंग्लैंड में सेंट वूल्फ्सटान पूर्वनार्मन काल में अपनी जेब में एक चाकू रखकर चलता था। जब भी कोई उसकी उसका आगे की ओर झुकता, वह चाकू से उसकी दाढ़ी का एक भाग काट डालता। 

फिर वह दाढ़ी का भाग उसके आगे फेक कर कहता था कि शेष दाढ़ी भी काट डालो, अन्यथा नर्क में जाओगे। दाढ़ी के विरुद्ध प्रचार बढ़ता गया वह 11वीं शताब्दी में धार्मिक अधिकारियों ने सारे यूरोप में दाढ़ी रखने पर प्रतिबंध लगा दिया।  इंग्लैंड में दाढ़ी के विरोध पर आंदोलन इतना तीव्र हो गया कि लंदन के नागरिको ने अपने सैंक्शन वंशज बताने व सरकार का विरोध करने के लिए दाढ़ी बनाना बिल्कुल बंद कर दिया। बाद में उन्होंने अपनी यूनियन बनाई व एक नेता चुना जो इतिहास में विलियम ऑफ द लॉन्ग वियूर के नाम से प्रसिद्ध हुए। 

इंग्लैंड में 1543 में कानून बन गया कि लंदन के नागरिक दाढ़ी नहीं रख सकते अन्यथा उसे नगर की स्वाधीनता प्राप्त नहीं होंगी। लेकिन इनमें दाढ़ी वाले वकीलों को दूना पैसा देना होता था। एक पखवाड़े तक की दाढ़ी बढ़ाने पर ही उसे चार पैसे का कर लगा दिया गया था। इसका विरोध जारी रहा कैंटरबरी का शारिफ भी उनमें से था जिसने दाढ़ी रखने व जुर्माना देना पसंद किया। 

फ्रांस में 1523 में दरबार में दाढ़ी रखना निषिद्ध कर दिया गया पर बाद में यह कानून समाप्त हो गया। 1907 में फ्रांस में उस कानून की वेटर्स ने जमकर खिलाफत की जिसके तहत उन्हें दाढ़ी मूछें रखने को कहा गया था। 

अमेरिका में दाढ़ी रखने के अधिकार पर संघर्ष चला 1830 में श्री जोसेफ पामेर को दाढ़ी रखने पर महन चर्च सभी जगह पर उपहास होता है। पर उसने दाढ़ी नहीं छोड़ी एक दिन आम लोगों ने उसे पकड़कर उसकी दाढ़ी काटने का प्रयत्न किया। पर पामेर ने दूसरी जेब से चाकू निकाल लिया व उनके प्रयत्न को विफल कर दिया। उसे तब चाकू के प्रयोग के अपराध में सजा मिली। जेल में जेलर ने उसकी दाढ़ी जलाने का प्रयास किया पर उसने दाढ़ी नहीं कटने दी। अंत में वह रिहा हुआ और अमेरिकन स्वाधीनता का हीरो माना जाने लगा। 

भारत में मुगल काल में जहां मुल्ला मौलवी दाढ़ी रखने पर जोर देते वही मुगल सम्राट दाढ़ी की को निरुत्साहित करते रहे। यहां तक औरंगजेब ने एक शाही फरमान जारी किया था की कोई चार इंच से लंबी दाढ़ी नहीं रख सकता। लंबी दाढ़ी होने पर उस पर कैंची चला दी जाती थी। #

***

टिप्पणी पोस्ट करें