कोरोना व पढ़ाई : कोरोना काल में नन्हे-मुन्ने बच्चों की पढ़ाई


मार्च 2020 के अंतिम सप्ताह से लॉक डाउन क्या शुरू हुआ बच्चों की पढ़ाई ही रुक गई ना स्कूल जाना ना स्कूल जाने की तैयारी करना और ना ही स्कूल से वापस आकर स्कूल के किस्से सुनाये जाना। आरंभ में तो यह अनायास ही प्राप्त छुट्टियों बड़ी अच्छी लगी पर धीरे धीरे घर में रहते बच्चे बोर होने लगे। अभिभावक भी पूरे दिन बच्चों के कामो और शोर गुल से थकने लगे। परंतु अब सबके सम्मिलित प्रयासों से तालाबंदी की स्थिति में ऑनलाइन पढ़ाई से बड़ी राहत मिली है। 

यह नई शिक्षा पद्धति सभी के लिए प्रभावी है और इससे बच्चे और शिक्षक बिना एक दूसरे के संपर्क में आए अपनी शिक्षा जारी रख पा रहे हैं। निसंदेह इस समय की सबसे बड़ी यही चुनौती है कि सामाजिक दूरी बनाकर सभी गतिविधियां अपने हिसाब से चलती रहे। ऑनलाइन शिक्षा प्रगति में मोबाइल या बैंक वेब कैमरे के सामने आकर ज़ूम, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल जैसे सॉफ्टवेयर द्वारा कक्षाओं को संचालित किया जाता है। दूरस्थ प्रांतों के तमाम बच्चे भी इस नई तकनीक का लाभ उठा रहे हैं तालाबंदी के चलते बच्चे विशेषकर छोटे बच्चों की पढ़ाई शून्य हो गई थी। 

पर शिक्षकों व स्कूल प्रबंधकों के सतत प्रयासों ने इस नवीन शिक्षा पद्धति को सरल व ग्रहय बना दिया। टीचर बच्चों के लिए अलग-अलग वीडियो बनाते हैं। कुछ ऐसा बताने का प्रयास करते हैं जो सामान्य स्कूल शिक्षा में संभव नहीं है। फोकस इस बात पर रहता है कि शिक्षा में गुणवत्ता के साथ-साथ बच्चों के शारीरिक संवेगात्मक संतुलन पर भी ध्यान केंद्रित रहे। शिक्षक शिक्षा देने की विधा में भी नए-नए प्रयोग कर रहे हैं, नई पहल कर रहे है। उनके प्रयास इस कठिन समय में भी बच्चों को प्रेरणा देकर सरल और मनोरंजक तरीकों से शिक्षा दे रहे हैं। इस तरह विश्वव्यापी दृष्टिकोण अपनाते हुए बच्चों को मूलभूत आवश्यकताओं को पूरी कर रहे हैं। 

शिक्षकों का पूरा प्रयास रहता है कि बच्चे मनोयोग से कक्षा में बैठे और पाठ्यक्रम पूरा करें। शिक्षण पाठ्यक्रम को रोचक और प्रभावी बनाने का प्रयास कर रहे है। बीच-बीच में कहानी, चुटकुले व प्रसंग सुनाकर बच्चों का उत्साह बढ़ा रहे है। बच्चों के अभिभावक भी अब शिक्षकों के प्रबंधन को सुन रहे हैं। अतः शिक्षकों को अधिक परिश्रम करना पड़ रहा है और नियमित रूप से पाठ्यक्रम पूरा किये जाने का प्रयास हो रहा है। 

अब क्योंकि बच्चे घर में रहकर ही पढ़ रहे हैं यानीकि क्लास जैसे वातावरण में बैठे हैं तो अभिभावकों का उत्तरदायित्व भी बढ़ जाता है जिस कमरे में बच्चा बैठे उसका माहौल क्लासरूम जैसा हो थोड़ी गंभीरता हो, थोड़ी सादगी हो और थोड़ी व्यवस्था भी।  पढ़ने के स्थान को व्यवस्थित कक्ष जैसा दिखना चाहिए बच्चे प्रतिदिन एक ही कमरे में एक ही स्थान पर कुर्सी मेज पर बैठने की व्यवस्था करें जहाँ पर्याप्त रौशनी व वायु आती हो।  इससे उचित शैक्षणिक वातावरण बनेगा। 

बच्चों को समय पर तैयार कर कक्षा में बिठाए। बच्चे को बताये कि क्लास में गंभीर होकर बैठे और जो टीचर पढ़ा रहा है उसे ध्यान से सुने, समझे। इधर उधर झांकना, देखना, मुंह बनाना, हंसना आदि ना करें। उसे ज्ञात होना चाहिए कि उसकी टीचर उसे देख रही है। ऐसी गतिविधियां बच्चों की छवि को नुकसान पहुंचा सकती हैं और इसका बच्चे की आंतरिक आकलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उसके आसपास बातें ना करें और ना ही आवाजाही होने दे। बेहतर होगा बच्चो को समय समय पर समझाएं और उनके साथ बैठे और इस तरह की पढ़ाई का महत्व बताएं। उन्हें इस नई शिक्षा पद्धति के लिए मानसिक रूप से तैयार करना है। 

शिक्षक और अभिभावक दोनों के तालमेल से ही छोटे बच्चों की शिक्षा प्रणाली में रुचि बढ़ाई जा सकती है। अभिभावक बच्चो कि पड़े में रूचि ले। समय दे और धैर्य के साथ पड़ने लिखने का अभ्यास कराये। ध्यान रहे शिक्षा कि इस प्रणाली में बच्चों की सहभागिता भी जरूरी है, तभी वह शिक्षा का आनंद उठा पाएंगे और उससे लाभान्वित होंगे। वस्तुओं के प्रति उनका नजरिया सृजनात्मकता और खोजी प्रवृत्ति को बढ़ाएगा। शिक्षकों की बच्चों के प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित किए जाने से उनमें उत्तरों की विवेचना के प्रवृत्ति विकसित होगी। 

पढ़ाने और सीखने की प्रक्रिया दो तरफा है। अब पूरा पाठ्यक्रम इस तरह तैयार किया जा रहा है जिसमें बच्चे की अपने और अपने वातावरण को जानने की स्वाभाविक उत्कंठा हो। निजी अनुभवों पर आधारित शिक्षा अधिक मजा देती है, और जल्दी समझ में आ जाती है। छोटे बच्चे को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान भी दिया जाए। उन्हें घर व उसके आसपास की घटनाओं को सुनाने बोलने वा सीखने पर जोर दिया जाए। जैसे चिड़ियों का देखना, गिनना, उन्हें दाना खिलाना, घर की छत या बगीचे में घूमना साड़ियां चद्दर से टेंट बनाकर कैंप लाइफ का लुत्फ उठाना या कलाकारों की एक्टिंग करना आदि। इस प्रकार के नियमित क्रमबद्ध पाठ्यक्रमों से उनके ज्ञान का विस्तार होगा साथ ही विभिन्न कौशल भी विकसित होंगे। 

बच्चे अपनी निजी नोटबुक पर प्रतिदिन कि होने वाली बातो को नोट करे। कोई नई बात सीखी है, नई कार्टून फिल्म देखी है, या मम्मी ने नई डिश बनाई है उसके बारे में भी लिखे। इससे एक तो उनमे लिखने की आदत विकसित होगी, लिखने की स्पीड बढ़ेगी और विचारो में कैसे तारतम्य बिठाया जाये यह भी सीख जायेंगे। कल्पनाशक्ति के साथ साथ शब्द विन्यास पर भी मजबूती आएगी। इसमें संदेह नहीं कि ऑनलाइन शिक्षा से उज्जवल, स्वस्थ और नवीन राष्ट्र का निर्माण होगा। #

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